केदारनाथ: हिमालय की गोद में बसे विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट आज बुधवार को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सुबह ठीक 8 बजे मंदिर के द्वार खुलते ही “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा धाम ही गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर 10 हजार से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे क्षेत्र में गहरी आस्था का माहौल भी देखने को मिला।

कपाट खुलने के मौके पर मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से भव्य रूप से भी सजाया गया। सीएम पुष्कर सिंह धामी स्वयं इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने और उन्होंने मंदिर में पहली पूजा अर्चना की, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न भी हुई।

बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि कपाट खुलने से पहले सुबह 5 बजे से धार्मिक अनुष्ठान शुरू भी हो गए थे। रावल भीमाशंकर लिंग व अन्य पुजारियों की मौजूदगी में गर्भगृह के द्वार की पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन भी शुरू हुए।

इस दौरान धाम में हल्की बर्फबारी के बीच ठंडा मौसम बना हुआ है, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी ही नहीं दिखी। तीर्थयात्रियों के लिए जगह-जगह भंडारे भी आयोजित भी किए गए हैं।

समिति ने सुरक्षा व मर्यादा को लेकर कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। मंदिर परिसर के 70 मीटर दायरे में मोबाइल फोन, फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी पर प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही धाम में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर भी रोक की बात भी कही गई है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार केदारनाथ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है व इसे विशेष रूप से ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा भी जाता है। मान्यता है कि द्वापर युग में पांडवों ने यहां भगवान शिव के केदारेश्वर रूप में ज्योतिर्लिंग की स्थापना भी की थी।

गौरतलब है कि 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम में व्यापक पुनर्निर्माण कार्य भी हुए हैं, जिससे यात्रा अब पहले से अधिक सुगम व सुरक्षित हो गई है। हर वर्ष बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या इस तीर्थ के प्रति लोगों की अटूट आस्था को भी दर्शाती है।

चारधाम यात्रा के तहत 19 अप्रैल को गंगोत्री धाम व यमुनोत्री धाम के कपाट पहले ही खुल चुके हैं। अब केदारनाथ के बाद गुरुवार को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह से शुरू भी हो जाएगी।