चंपावत के 29 साल: विकास की रफ्तार के बीच दूरस्थ गांवों तक सुविधाएं पहुंचाने की चुनौती
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कुमाऊं के चंद राजाओं की राजधानी रहे चंपावत जिले को अस्तित्व में आए 29 वर्ष पूरे हो गए हैं। 15 सितंबर 1997 को जिले का गठन हुआ था। इन वर्षों में चंपावत ने विकास के कई पड़ाव तय किए हैं, लेकिन आज भी कई दूरस्थ गांव सड़क, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। सीमित चिकित्सा सुविधाओं के कारण गंभीर बीमारी या इलाज के लिए लोगों को पिथौरागढ़, खटीमा, हल्द्वानी और बरेली तक जाना पड़ता है। कई गांवों में सड़क नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और इसका असर पलायन पर भी पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चंपावत से चुनाव जीतने के बाद पिछले ढाई वर्षों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार के क्षेत्र में कई काम हुए हैं। जिले में सड़क, रेल, पेयजल, पर्यटन, धर्म, संस्कृति, पशुपालन और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहे हैं। मां पूर्णागिरि मेला और मां वाराही धाम का बगवाल मेला जिले की धार्मिक पहचान हैं। टनकपुर से देश के विभिन्न हिस्सों के लिए ट्रेनों के संचालन से यातायात बेहतर हुआ है। हल्द्वानी-चंपावत हेली सेवा से भी लोगों को राहत मिली है। टीजे सड़क पूरी होने के बाद सीमांत पिथौरागढ़ तक आवागमन और आसान होने की उम्मीद है।
बनबसा के गुदमी में करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से लैंड ड्राईपोर्ट विकसित किया जा रहा है। करीब 84 एकड़ वन भूमि में बनने वाली इस परियोजना का लक्ष्य मार्च 2027 रखा गया है। इसमें पैसेंजर टर्मिनल, पार्किंग, एडमिन ब्लॉक, पोर्टर्स एरिया और वॉच टावर जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। भारत की ओर करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में निर्माण होना है, जबकि नेपाल की ओर निर्माण कार्य पहले ही शुरू हो चुका है। इसके तैयार होने से भारत-नेपाल व्यापार, यात्री आवागमन और सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
लोहाघाट के छमनिया में राज्य के पहले बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज का संचालन शुरू हो गया है। करीब 237 करोड़ रुपये की लागत से कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। यहां फुटबाल, हॉकी और वॉलीबाल समेत अन्य खेलों के मैदान, हॉस्टल, स्टाफ क्वार्टर और प्रशासनिक भवन प्रस्तावित हैं। फिलहाल 30 बालिकाएं एथलेटिक्स, बैडमिंटन और बॉक्सिंग का प्रशिक्षण ले रही हैं।
टनकपुर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ड्रीम प्रोजेक्ट शारदा घाट का करीब 185.20 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्निर्माण किया जा रहा है। करीब 520 मीटर लंबे और 75 मीटर चौड़े घाट में स्नान घाट, आधुनिक आरती स्थल, विश्राम सुविधाएं, पैदल मार्ग, प्रकाश व्यवस्था और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। यहां ऋषिकेश की तर्ज पर नियमित भव्य आरती की योजना है। परियोजना में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और फ्लोर कूलिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। इसके पूरा होने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जिला मुख्यालय में प्रस्तावित गोल्ज्यू कॉरिडोर भी जिले के विकास की बड़ी परियोजनाओं में शामिल है। करीब 570 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना में 400 मीटर रनिंग ट्रैक, बहुउद्देशीय सभागार, हॉकी फील्ड, बैडमिंटन हॉल, पार्किंग और कैफेटेरिया जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। इसके अलावा गोल्ज्यू देवता कॉरिडोर, ओपन एयर थिएटर, कॉमर्शियल जोन और अंडरग्राउंड ऑटोमेटेड पार्किंग भी विकसित की जाएगी। गौरलचौड़ मैदान की भूमि 15 साल से अधिक समय बाद पर्यटन विभाग को हस्तांतरित हुई है। कॉरिडोर बनने से खेल सुविधाओं के साथ धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। जिला अस्पताल चंपावत में तीन डायलिसिस मशीनें और उप जिला अस्पताल टनकपुर में तीन डायलिसिस यूनिट स्थापित की गई हैं। पहाड़ी जिलों में जिला अस्पताल चंपावत में एमआरआई सुविधा शुरू होना भी बड़ी उपलब्धि है। ब्लड कंपोनेंट यूनिट की स्थापना से मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि आधुनिक सुविधाओं के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। टनकपुर में बाल रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञों के पद खाली हैं, जबकि लोहाघाट और जिला अस्पताल चंपावत में भी विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। लोगों की उम्मीद है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होने से गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
हवाई सेवा को और मजबूत करने के लिए हवाई पट्टी निर्माण के लिए भूमि तलाश की जा रही है। पूर्णागिरि क्षेत्र में प्रस्तावित रोपवे से मंदिर तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। वहीं शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर के जरिए धार्मिक, खेल और साहसिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
शिक्षाविद् डॉ. बीडी सुतेड़ी के मुताबिक बीस सूत्री कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में चंपावत का लगातार प्रथम स्थान हासिल करना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन सरकार की योजनाओं का लाभ पूरी तरह पात्र लोगों तक पहुंचना जरूरी है। वहीं राजकीय महाविद्यालय बनबसा के प्राध्यापक एवं पर्यावरणविद् डॉ. कमलेश शक्टा का कहना है कि जिले में विकास की रफ्तार बढ़ी है, लेकिन मेडिकल कॉलेज, किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज और हर ब्लॉक में आधुनिक स्टेडियम जैसी सुविधाओं पर भी प्राथमिकता से काम किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर 29 वर्षों में चंपावत ने प्रशासनिक और विकास के स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन आदर्श जिले की परिकल्पना को पूरा करने के लिए दूरस्थ गांवों तक सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और संचार जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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