देहरादून: उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को जून महीने में भी महंगी बिजली का झटका भी लगेगा। उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने जून 2026 के लिए ईंधन व बिजली खरीद लागत समायोजन (FPPCA) की नई दरें जारी भी कर दी हैं। ये दरें 1 जून से 30 जून तक प्रभावी भी रहेंगी और इसी आधार पर उपभोक्ताओं के बिजली बिल भी तैयार किए जाएंगे।
दरअसल, यूपीसीएल जब बाजार से नियामक आयोग द्वारा निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर बिजली खरीदता भी है, तो अतिरिक्त लागत की वसूली एफपीपीसीए के माध्यम से उपभोक्ताओं से ही की जाती है। वहीं, यदि बिजली सस्ती दरों पर खरीदी जाती है तो उपभोक्ताओं को राहत दी जाती है। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बढ़ने से यूपीसीएल को महंगी दरों पर बिजली भी खरीदनी पड़ रही है, जिसके चलते जून महीने के लिए एफपीपीसीए सरचार्ज में बढ़ोतरी भी की गई है।
यूपीसीएल के मुख्य अभियंता (व्यावसायिक) एन.एस. बिष्ट द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई दरों के आधार पर इस महीने के बिजली बिलों में अतिरिक्त राशि भी जोड़ी जाएगी। उल्लेखनीय है कि मई महीने में भी एफपीपीसीए के कारण उपभोक्ताओं के बिजली बिल भी बढ़े थे।
यह फैसला उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के नियमों, टैरिफ आदेश व विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 45 के तहत ही लिया गया है। हालांकि, ओपन एक्सेस के माध्यम से बिजली प्राप्त करने वाले उपभोक्ताओं पर यह सरचार्ज लागू भी नहीं होगा।
यूपीसीएल प्रबंधन के अनुसार, आदेश लागू होने के बाद पहली मीटर रीडिंग में एमआरआई (मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट) वाले उपभोक्ताओं की बिलिंग 1 जून से नई दरों पर ही की जाएगी। अन्य मामलों में पुरानी और नई दरों के अनुपात के आधार पर बिल तैयार भी होगा। राहत की बात यह है कि इस सरचार्ज को लो पावर फैक्टर सरचार्ज, वोल्टेज रिबेट, प्रीपेड मीटरिंग रिबेट व कंटीन्यूअस सप्लाई सरचार्ज की गणना में शामिल ही नहीं किया जाएगा।
जानिए किस श्रेणी के उपभोक्ताओं पर कितना बढ़ा भार (प्रति यूनिट):
• बीपीएल उपभोक्ता – 23 पैसे
• घरेलू उपभोक्ता – 59 से 65 पैसे
• अघरेलू उपभोक्ता – 90 से 94 पैसे
• सरकारी सार्वजनिक उपयोगिता – 89 पैसे
• निजी ट्यूबवेल – 29 पैसे
• कृषि गतिविधियां – 41 से 46 पैसे
• एलटी उद्योग – 82 से 87 पैसे
• एचटी उद्योग – 85 पैसे
• मिश्रित लोड – 84 पैसे
• रेलवे ट्रैक्शन – 82 पैसे
• ईवी चार्जिंग स्टेशन – 82 पैसे
• अस्थायी कनेक्शन – 1.01 रुपये
लगातार दूसरे महीने एफपीपीसीए सरचार्ज बढ़ने से घरेलू व व्यावसायिक उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय भी माना जा रहा है।
