उत्तरकाशी। विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों और उपेक्षा के बीच जीवन बिता रहे पुरोला के दो मासूम बच्चों की जिंदगी अब धीरे-धीरे बदल रही है। जिला बाल कल्याण समिति की पहल और संरक्षण संबंधी प्रयासों से दोनों बच्चों को सुरक्षित वातावरण मिला है। कभी अपनी बात तक नहीं कह पाने वाले ये बच्चे अब बोलना सीख रहे हैं। दूसरे बच्चों के साथ खेलकूद करने के अलावा आंगनबाड़ी केंद्र भी जाने लगे हैं। बाल कल्याण समिति के प्रयासों से बच्चों के जीवन में आए इस बदलाव को बाल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जिला बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष पुष्पा चौहान ने बताया कि जून 2025 में पुरोला विकासखंड के दो बच्चों से जुड़ा एक संवेदनशील मामला समिति के संज्ञान में आया था। परिवार की स्थिति बेहद चिंताजनक थी। बच्चों की मां घर छोड़कर जा चुकी थी, जबकि उनके पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और कई-कई दिनों तक घर से बाहर नहीं निकलते थे। वहीं, करीब 80 वर्षीय मूकबधिर दादी गांव से भोजन जुटाकर किसी तरह अपना और बच्चों का पेट पाल रही थीं।
ऐसे हालात में दोनों बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई थी। पुष्पा चौहान ने बताया कि जब वह अपनी टीम के साथ बच्चों से मिलने पहुंचीं तो चार वर्षीय बालक और तीन वर्षीय बालिका की स्थिति देखकर उन्हें काफी चिंता हुई। दोनों बच्चे बोलना तक नहीं जानते थे। उचित देखभाल, संवाद और अनुकूल वातावरण की कमी के कारण उनके विकास पर असर पड़ रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए समिति ने तत्काल हस्तक्षेप किया और बच्चों को सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की।
पुष्पा चौहान के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में बाल संरक्षण के लिए चाइल्ड केयर संस्थानों, उपयुक्त देखभाल केंद्रों और फोस्टर केयर जैसी सुविधाओं की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में बच्चों के पुनर्वास के लिए उचित व्यवस्था करना आसान नहीं था। समिति ने किशोर न्याय अधिनियम के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए एक विशिष्ट दत्तक ग्रहण एजेंसी को फिट फैसिलिटी घोषित किया। इसके बाद नवंबर 2025 में दोनों बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से संस्थान पहुंचाया गया, जहां उनकी देखभाल और पुनर्वास की व्यवस्था की गई।
संस्थान में सुरक्षित माहौल और उचित देखभाल मिलने के बाद बच्चों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दोनों अब बोलना सीख रहे हैं और दूसरे बच्चों के साथ खेलकूद में भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही वे आंगनबाड़ी केंद्र भी जाने लगे हैं, जहां उन्हें सीखने और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
बच्चों के भविष्य के लिए पैतृक संपत्ति की सुरक्षा की पहल
बाल कल्याण समिति का प्रयास केवल बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके दीर्घकालिक हितों और भविष्य की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में समिति ने दोनों बच्चों की पैतृक संपत्ति को सुरक्षित रखने का मुद्दा उठाया है।
समिति की अध्यक्ष पुष्पा चौहान ने बताया कि इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पुरोला के उपजिलाधिकारी को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों के पिता की ओर से जमीन बेचे जाने की स्थिति में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि बच्चों के संपत्ति संबंधी अधिकारों की रक्षा की जा सके।
समिति के मुताबिक, दोनों बच्चों को वर्तमान में सुरक्षित संरक्षण देने के साथ उनके समुचित विकास, अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित बनाना प्राथमिकता है। बाल कल्याण समिति की पहल से दोनों बच्चों को नया माहौल मिला है, जहां वे धीरे-धीरे सामान्य जीवन की गतिविधियों से जुड़ रहे हैं।
