नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अल्मोड़ा विश्वविद्यालय के विधि संकाय में अतिथि शिक्षक प्रियंका को पुनर्नियुक्ति न देने के मामले में सख्त रुख भी अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की कार्रवाई पर गंभीर सवाल भी उठाए।

याचिकाकर्ता प्रियंका ने अपनी पुनर्नियुक्ति न होने और विभागाध्यक्ष द्वारा की गई कार्रवाई को अदालत में चुनौती भी दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि विभागाध्यक्ष द्वारा पुनः नियुक्ति से इनकार करना भेदभावपूर्ण, दुर्भावनापूर्ण व प्रतिशोधात्मक प्रतीत होता है।

याचिका में बताया गया है कि प्रियंका विभागाध्यक्ष के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के समक्ष गवाह रही हैं और समिति ने विभागाध्यक्ष के खिलाफ प्रतिकूल रिपोर्ट दी है। इसके बावजूद कुलपति स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई ही नहीं की गई। साथ ही आरोप है कि अदालत के पूर्व आदेशों के बावजूद उन्हें कार्यभार संभालने नहीं दिया गया और बाद में ड्यूटी पर न आने का हवाला देकर उनका पारिश्रमिक रोक भी दिया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने विभागाध्यक्ष के खिलाफ चल रही जांच की स्थिति स्पष्ट करने के लिए 2 दिन का समय मांगा। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त किया कि पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन भी किया जाएगा।

कोर्ट ने इस पर अगली सुनवाई की तिथि 1 अप्रैल निर्धारित की है और मामले में आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश भी दिए हैं।