रायपुर: रायपुर में दो पार्टियों के बीच चल रहे एक विवादित प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। अखिल भारतीय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने पुलिस पर संविधान तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस ने एक पक्ष का समर्थन करते हुए दूसरे पक्ष की पूरी तरह से अनदेखी की है।
उन्होंने बताया कि पीड़ित पक्ष उनकी मदद की गुहार लेकर आया था, जिसके बाद उन्होंने सभी दस्तावेज़ों की जांच कर उन्हें रायपुर थाने में प्रस्तुत किया। लेकिन एएसआई बब्बन सिंह रावत, जो इस मामले की जांच कर रहे थे, ने दूसरी पार्टी के झूठे आरोपों को मानते हुए पुलिस को कोर्ट में जाने के लिए प्रेरित किया।
प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि पुलिस ने उनके खिलाफ शांति भंग करने का आरोप लगाकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जबकि वे सिर्फ न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड के नागरिक होने के बावजूद पुलिस उनके खिलाफ कोर्ट में जाकर न्यायिक हिरासत की मांग कर रही है, जो कि पूरी तरह से गलत है।
अखिल भारतीय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने इसी तरह का रवैया जारी रखा तो करणी सेना पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो सेना धरना प्रदर्शन से लेकर सड़कों पर जाम लगाने तक के लिए तैयार है।
यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और प्रदेश में इसकी गूंज सुनाई देने लगी है। करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने पुलिस को स्पष्ट संदेश दिया है कि अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी, चाहे उनके खिलाफ कितने भी मुकदमे दर्ज किए जाएं।
