उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया है। इसका उद्देश्य 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना है।

विधेयक के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक यानी पांच वर्षों की अवधि में राज्य सरकार को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत तक सीमित रखना होगा। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक राज्य के कुल दायित्वों या संचयी ऋण की सीमा जीएसडीपी के 30 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।

इसके अलावा, केंद्र सरकार की पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत किए गए खर्च को राजकोषीय घाटे की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों या प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य के वित्त पर अप्रत्याशित बोझ पड़ने की स्थिति में राजकोषीय और राजस्व घाटे की निर्धारित सीमा में शर्तों के साथ छूट देने का प्रावधान भी किया गया है।

हालांकि, यदि राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा से अधिक होने की स्थिति बनती है, तो राज्य सरकार को इसके कारणों और विस्तृत रिपोर्ट को जल्द से जल्द विधानसभा के पटल पर रखना अनिवार्य होगा। इस विधेयक के जरिए सरकार ने वित्तीय जवाबदेही बढ़ाने, कर्ज पर नियंत्रण रखने और प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने की दिशा में कदम उठाया है।