उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में भारत-तिब्बत व्यापार पर मौसम की मार पड़ी है। तिब्बत के तकलाकोट में 27 से 29 अक्टूबर के बीच भारी बर्फबारी की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने भारतीय व्यापारियों को वापस लौटने के निर्देश दिए। इसके बाद तकलाकोट में मौजूद सभी 28 भारतीय व्यापारियों ने अपना सामान समेटकर भारत लौटना शुरू कर दिया। व्यापारी 26 अक्टूबर से लिपुलेख दर्रे के रास्ते भारतीय क्षेत्र में पहुंचने लगे।

व्यापारी महेश सिंह ह्यांकि ने मंगलवार देर रात धारचूला पहुंचने पर बताया कि 26 अक्टूबर की दोपहर तक सभी 28 व्यापारी लिपुलेख दर्रे को पार कर चुके थे। बर्फ के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी तक खच्चरों की मदद से सामान मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया। इसके बाद वाहनों के जरिए सामान गुंजी लाया गया। यहां कस्टम विभाग सामान की जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद व्यापारी अपना सामान धारचूला लाएंगे।

गौरतलब है कि कोविड महामारी के बाद इस साल छह साल के अंतराल पर भारत-तिब्बत व्यापार दोबारा शुरू हुआ था। व्यापार एक अगस्त से शुरू होकर 31 अक्टूबर तक चलना निर्धारित था, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण सड़क बंद होने की आशंका के चलते व्यापारियों को छह दिन पहले ही लौटना पड़ा।

व्यापारियों का कहना है कि इस साल तकलाकोट प्रशासन से व्यापार की अनुमति देर से मिलने के कारण कई व्यापारी अपना सामान मंडी तक नहीं पहुंचा पाए। ऐसे में व्यापार समय से पहले बंद होने से उन्हें खास लाभ नहीं मिल सका। छह साल बाद व्यापार शुरू होने से व्यापारियों को बेहतर कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन मौसम और अनुमति में देरी के कारण उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।

धारचूला के ट्रेड अधिकारी एवं एसडीएम आशीष जोशी के मुताबिक, सभी भारतीय व्यापारी सुरक्षित भारतीय क्षेत्र के गुंजी पहुंच चुके हैं। फिलहाल कस्टम विभाग उनके सामान की जांच कर रहा है। इस साल के आयात-निर्यात से संबंधित आंकड़े बुधवार देर शाम या गुरुवार तक मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।