2027 चुनाव में तीसरे विकल्प के तौर पर उभर सकता है उक्रांद, क्षेत्रीय मुद्दों पर बढ़ी सक्रियता
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उत्तराखंड राज्य आंदोलन से निकला उत्तराखंड क्रांति दल एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय नजर भी आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि उक्रांद संगठनात्मक रूप से मजबूत होकर स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से भी उठाता है, तो वह 2027 विधानसभा चुनाव में तीसरे विकल्प के रूप में उभर भी सकता है।
अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर गठित उक्रांद से आज भी राज्य आंदोलन से जुड़े लोग व क्षेत्रीय पहचान को महत्व देने वाला वर्ग भावनात्मक रूप से जुड़ा भी हुआ है। हाल के दिनों में पार्टी की जिला स्तर पर बढ़ी सक्रियता व कई प्रमुख लोगों के शामिल होने से संगठन में नया उत्साह भी देखा जा रहा है।
दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने दावा किया कि सकारात्मक सोच रखने वाले लोग लगातार पार्टी से जुड़ रहे हैं और आने वाले समय में संगठन और मजबूत भी होगा। उन्होंने भाजपा व कांग्रेस पर राज्य की उपेक्षा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 26 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी व पलायन जैसे मूल मुद्दों पर अपेक्षित काम नहीं हुआ।
उक्रांद नेताओं ने संकेत दिए हैं कि पार्टी प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रही है। हालांकि समान विचारधारा वाले संगठनों व दलों के साथ चुनावी तालमेल की संभावना से भी इनकार ही नहीं किया गया है।
हाल ही में पूर्व कुलपति यूएस रावत, प्रो. जेपी पंवार, कर्नल शक्ति बजाज, पूर्व सीएमओ डॉ. बीएस रावत, पूर्व आईएफएस एमएस पाल व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरीश जुगरान जैसे कई प्रमुख लोग उक्रांद से भी जुड़े हैं। इससे पार्टी को बौद्धिक और सामाजिक स्तर पर मजबूती मिलने की चर्चा भी है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बेरोजगारी, पलायन, भू-कानून व मूल निवास जैसे मुद्दों पर उक्रांद के आक्रामक रुख से भाजपा और कांग्रेस दोनों के वोट बैंक पर असर भी पड़ सकता है, खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में जहां क्षेत्रीय भावनाएं अब भी प्रभावी भी मानी जाती हैं।
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