देहरादून: उत्तराखंड के सीमांत इलाकों के विकास को नई रफ़्तार देने के लिए वाइब्रेंट विलेज योजना में कुल 91 गांवों का चयन भी किया गया है। ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने योजना की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए इसे राज्य के लिए बड़ा अवसर भी बताया।

मंत्री जोशी ने कहा कि भारत-चीन व भारत-नेपाल सीमा से सटे ये गांव अब मॉडल विलेज के रूप में विकसित भी किए जाएंगे, जहां बेहतर बुनियादी ढांचा, आजीविका के अवसर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध भी कराई जाएंगी।

वीवीपी-1: भारत-चीन सीमा के 51 गांव शामिल

उत्तरकाशी, चमोली व पिथौरागढ़ जिलों के कुल 51 गांवों को प्रथम चरण में शामिल किया गया है। इन गांवों के विकास के लिए राज्य सरकार ने ₹520 करोड़ का प्रस्ताव भेजा था, जिसमें से ₹110 करोड़ से अधिक की धनराशि भी जारी हो चुकी है।

वीवीपी-2: भारत-नेपाल सीमा के 40 गांव चयनित

दूसरे चरण में चंपावत, पिथौरागढ़ व ऊधम सिंह नगर के 40 गांवों को शामिल किया गया है। इन गांवों के लिए डेटा संकलन भी जारी है। पिथौरागढ़ में पीएमजीएसवाई के तहत ₹119.44 करोड़ की लागत से 5 नई सड़कों को मंजूरी दी गई है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा-निर्देशों पर यह योजना सीमांत गांवों को आत्मनिर्भर बनाने व पलायन रोकने में अहम भूमिका भी निभाएगी। साथ ही कृषि-बागवानी, पर्यटन, संस्कृति व स्थानीय उत्पादों को भी नया बाज़ार मिलेगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि वाइब्रेंट विलेज योजना उत्तराखंड के दुर्गम गांवों को उन्नत, सुरक्षित व आत्मनिर्भर मॉडल विलेज में बदलने में मील का पत्थर भी साबित होगी।