उत्तराखण्ड में नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ उत्तराखण्ड एसटीएफ की सर्जिकल स्ट्राइक जारी ही है। एसटीएफ ने ब्रांडेड कंपनियों की नकली जीवनरक्षक दवाएं बनाने व बाजार में बेचने वाले गिरोह के 3 और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक कुल 16 आरोपियों को पकड़ा भी जा चुका है।

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देश पर एसटीएफ को नकली दवा गैंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश भी दिए गए थे। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने टीमों को गिरोह की पूरी कुंडली तैयार कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए थे।

दरअसल, 1 जून 2025 को प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नकली रैपर, आउटर बॉक्स, लेबल व क्यूआर कोड के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। यह मामला सेलाकुई थाने में दर्ज किया गया था, जिसे बाद में गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ को भी सौंप दिया गया।

जांच के दौरान पहले गिरफ्तार आरोपी नवीन बंसल उर्फ अक्षय ने खुलासा किया कि वह नकली दवाएं नरेश धीमान, लोकेश गुलाटी व मोहतरम अली से खरीदकर बाजार में बेचता था। इसके बाद एसटीएफ टीम ने 17 फरवरी 2026 को दबिश देकर इन तीनों आरोपियों को रुड़की व देवबंद से गिरफ्तार कर लिया।

इस पूरे मामले में पहले की कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में नकली दवाएं व निर्माण सामग्री बरामद की गई थी, जिनमें 263 किलो पैरासिटामोल, 2490 किलो जिंक पाउडर, 5000 पैरासिटामोल टैबलेट व 16,200 ऑक्सालजिन-डीपी टैबलेट शामिल हैं। उत्तराखण्ड की सरकारी लैब जांच में इन सभी दवाओं व पैकिंग सामग्री को नकली पाया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों में नरेश धीमान और लोकेश गुलाटी हरिद्वार जिले के निवासी हैं, जबकि मोहतरम अली सहारनपुर के देवबंद का रहने वाला भी है। पुलिस के अनुसार लोकेश गुलाटी के खिलाफ पहले भी नकली दवाओं से जुड़ा एक मामला दर्ज है और अन्य राज्यों से भी आपराधिक इतिहास की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

एसटीएफ का कहना है कि नकली दवाओं के इस संगठित नेटवर्क के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी ही रहेगी।