उत्तराखंड में युवाओं में बढ़ती नशे की लत एक गंभीर समस्या भी बनती जा रही है। नशे के सेवन से ना केवल युवाओं का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनके भविष्य पर भी इसका नकारात्मक असर भी पड़ रहा है। खासतौर पर शराब, सिगरेट जैसे पदार्थों के सेवन से हड्डियों में तेजी से कमजोरी भी आ रही है, जिससे कूल्हे की हड्डी जल्दी ही खराब हो रही है और युवाओं में हड्डी से संबंधित समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
नशे से हड्डी रोगों का खतरा
रामपुर रोड स्थित एक होटल में उत्तराखंड आर्थोपेडिक एसोसिएशन के 3 दिवसीय वार्षिक सम्मेलन में पीजीआई चंडीगढ़ से आए हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ शर्मा ने बताया कि नशे का सेवन युवाओं में हड्डी रोगों को बढ़ावा भी दे रहा है। उन्होंने कहा कि नशे से शरीर में कैल्शियम की कमी भी होती है, जो जोड़ों में दिक्कतें उत्पन्न करता है। विशेष रूप से कूल्हे की हड्डी, जो हमारे शरीर का प्रमुख वजन सहन करने वाला जोड़ है, नशे के कारण जल्दी ही कमजोर हो जाता है। इससे युवाओं में जोड़ो के दर्द, कमर दर्द जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
बोन कैंसर का खतरा बढ़ रहा है
डॉ. शर्मा ने बताया कि भारत में बोन कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसका मुख्य कारण खराब खान-पान व गलत जीवनशैली है। बोन कैंसर में हड्डी में गांठ बन जाती है, जो युवाओं में विशेष रूप से 14-24 आयु वर्ग में ज्यादा देखने को भी मिलती है। कैंसर का इलाज समय पर होना बेहद जरूरी है, इसलिए हड्डी में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क भी करना चाहिए।
3-डी प्रिंटिंग तकनीक का प्रयोग
डॉ. शर्मा ने बताया कि वर्तमान में हड्डी रोग विशेषज्ञ 3-डी प्रिंटिंग तकनीक का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। इस तकनीक की मदद से डॉक्टर रोगी की हड्डी में समस्या वाले हिस्से का माडल भी बना सकते हैं, जिससे सर्जन को स्थिति को समझने में मदद भी मिलती है। इसके बाद कुछ घंटों में बिल्कुल उसी तरह का कृत्रिम अंग तैयार भी किया जा सकता है, जिससे सर्जरी में समय की बचत होती है और इलाज अधिक प्रभावी भी होता है।
डॉ. शर्मा ने कहा कि यह नई तकनीक हड्डी से संबंधित गंभीर समस्याओं के इलाज में वरदान भी साबित हो रही है।
