पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचे, गांधी विचारों और पर्यावरण संरक्षण पर हुई चर्चा
Deprecated: preg_split(): Passing null to parameter #3 ($limit) of type int is deprecated in /home/u948756791/domains/doondarshan.in/public_html/wp-content/themes/jannah/framework/functions/post-functions.php on line 805
ऋषिकेश। भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद परमार्थ निकेतन आश्रम पहुँचे। उनके साथ उनकी पत्नी सविता कोविंद व बेटी स्वाति कोविंद भी उपस्थित रहीं। आश्रम में उनका पारंपरिक स्वागत भी किया गया। परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने पुष्प वर्षा, शंख ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्व राष्ट्रपति का अभिनंदन किया।
आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर मां गंगा के तट पर उनका सम्मान किया। इस अवसर पर दोनों महानुभावों ने महात्मा गांधी के आदर्शों, भारतीय संस्कृति, संस्कारों व आधुनिक भारत में मूल्यों की प्रासंगिकता पर गहन चर्चा भी की।
“रामनाथ कोविंद का जीवन बना प्रेरणा” – स्वामी चिदानंद सरस्वती
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा,
“रामनाथ कोविंद का जीवन स्वयं में एक प्रेरक यात्रा है। एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद को सादगी, समर्पण और मूल्यों के साथ सुशोभित किया।”
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल भूगोल नहीं, बल्कि एक भावना है — जिसमें विविधता में एकता, संस्कृति में श्रद्धा, व जीवन में सह-अस्तित्व की गहराई निहित है।
गांधी के ‘रामराज्य’ की आज भी जरूरत: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने अपने संबोधन में कहा,
“महात्मा गांधी के लिए रामराज्य कोई धार्मिक कल्पना नहीं, बल्कि एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था थी, जहाँ कोई भूखा न हो, न कोई शोषित, और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, न्याय और अधिकार प्राप्त हो। आज के दौर में भी यह अवधारणा उतनी ही आवश्यक है, जितनी स्वतंत्रता संग्राम के समय थी।”
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा कि गंगा एक्शन परिवार, ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस व परमार्थ निकेतन द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता और जल संरक्षण अभियानों को वैश्विक प्रेरणा भी बताया।
पर्यावरण संरक्षण को बताया सबसे बड़ी जरूरत
कोविंद ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित व स्वच्छ पर्यावरण छोड़ना हम सबका नैतिक दायित्व है।
“परमार्थ निकेतन द्वारा गंगा व पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया जा रहा कार्य वास्तव में अनुकरणीय है और पूरी दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत भी है,”।




