देहरादून : केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर, देवप्रयाग में आगामी शैक्षणिक सत्र 2024-25 से छात्रों व शिक्षकों दोनों के लिए अनुशासन और परंपरा पर आधारित नए नियम भी लागू किए जा रहे हैं। नए सत्र की शुरुआत 16 जून से होगी और इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में शैक्षणिक व छात्रावासी जीवन में बदलाव देखने को भी मिलेंगे।
अब केवल संस्कृत में ही संवाद
नए नियमों के अनुसार परिसर में केवल संस्कृत भाषा में संवाद अनिवार्य भी कर दिया गया है। परिसर निदेशक प्रो. पीवीबी सुब्रह्मण्यम ने बताया कि विश्वविद्यालय को संस्कृतनिष्ठ व अनुशासित शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए यह कदम भी उठाया गया है।
छुट्टियां भी अब पंचांग के अनुसार
सामान्य सप्ताहांत अवकाश की जगह अब छात्र प्रतिपदा, अष्टमी, अमावस्या व पूर्णिमा जैसे चंद्रमा के अनुसार निर्धारित तिथियों पर ही छुट्टी पाएंगे। इससे छात्रों में भारतीय पंचांग व परंपराओं के प्रति समझ और अनुशासन विकसित करने का प्रयास भी किया गया है।
छात्रावास में सख्त अनुशासन
छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को अब सुबह 4:30 बजे जागना भी अनिवार्य होगा। रात 9 बजे सभी के मोबाइल फोन जमा कर लिए जाएंगे और अगली सुबह 8 बजे ही वापस किए जाएंगे। साथ ही सभी छात्रों को निर्धारित यूनिफॉर्म में ही आना अनिवार्य होगा।
छात्रावास में सीट आवंटन मेरिट, दूरी व अनुशासन के आधार पर किया जाएगा। जो छात्र विश्वविद्यालय से 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं, उन्हें हॉस्टल सुविधा भी नहीं दी जाएगी। इस बार अधिकतम 550 छात्रों को ही छात्रावास में प्रवेश भी दिया जाएगा, जबकि कुल क्षमता 570 है।
शिक्षकों पर भी लागू होंगे ड्रेस कोड नियम
नए नियमों के दायरे में शिक्षक वर्ग भी शामिल है। पुरुष शिक्षकों को अब धोती या पायजामा-कुर्ता और महिला शिक्षिकाओं को साड़ी या सलवार-सूट पहनकर आना होगा। इस कदम का उद्देश्य शिक्षकों को भी पारंपरिक मूल्यों के अनुरूप भी लाना है।
प्रो. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि
इन बदलावों से न केवल अनुशासन में वृद्धि होगी, बल्कि संस्कृत भाषा व संस्कृति की वास्तविक भावना को भी मजबूती मिलेगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि परिसर एक जीवंत गुरुकुल परंपरा का आधुनिक प्रतीक भी बने।
