उत्तराखंड सरकार ने मदरसों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए मान्यता नहीं लेने वाले संस्थानों पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड को भंग कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। अब प्रदेश में संचालित मदरसों को राज्य शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम पढ़ाने के लिए प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य होगा।
समाज कल्याण मंत्री खजानदास ने कहा कि सरकार मदरसों में दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा के खिलाफ नहीं है, लेकिन उन्हें एक निर्धारित व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 452 मदरसों में से 200 से अधिक ने अब तक मान्यता नहीं ली है। ऐसे मदरसों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग में केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि सिख, ईसाई और बौद्ध समेत अन्य समुदाय भी शामिल हैं। इन्हीं सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है।
खजानदास ने समाज कल्याण विभाग की योजनाओं को लेकर बताया कि अब करीब 9 लाख 87 हजार पेंशनधारकों को हर महीने सात तारीख से पहले पेंशन उनके खातों में भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पेंशन वितरण व्यवस्था को सरल और समयबद्ध किया है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार विधवा पेंशन में वृद्धि के साथ इसका नाम बदलकर ‘एकल नारी सम्मान’ करने की दिशा में काम कर रही है। वहीं, हल्द्वानी में शुद्धिकरण के मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक हथकंडा बताते हुए कहा कि भाजपा इस पूरे मामले से खुद को अलग करती है।
