देहरादून: जलवायु परिवर्तन और पानी की बढ़ती कमी के बीच उत्तराखंड सरकार खेती में नए विकल्प भी तलाश रही है। इसी कड़ी में ग्राम्य विकास विभाग पहली बार राज्य में किनोवा (Quinoa) की खेती का पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू करने जा रहा है।
पहले चरण में पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण क्षेत्र में करीब 100 एकड़ भूमि पर किनोवा की खेती भी की जाएगी। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो इसे अन्य पर्वतीय जिलों तक भी विस्तार भी दिया जाएगा।
ग्राम्य विकास विभाग के सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि यह सरकारी स्तर पर किनोवा की खेती का पहला प्रयास भी है। उनका कहना है कि यह फसल कम पानी व कम लागत में बेहतर उत्पादन देती है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद भी मिलेगी।
किनोवा को दुनिया भर में ‘सुपरफूड’ माना भी जाता है। यह प्रोटीन, फाइबर, आयरन व कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर है। इसकी बाजार में अच्छी मांग है और इसकी कीमत सामान्य तौर पर 80 से 150 रुपये प्रति किलो, जबकि ऑर्गेनिक किनोवा 300 रुपये प्रति किलो तक बिक भी सकता है।
सरकार का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को नया विकल्प मिलेगा, किसानों की आमदनी बढ़ेगी व कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सकेगा।
