मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क को लेकर कारोबारियों में असमंजस और विरोध बढ़ता दिखाई दे रहा है। व्यवस्था लागू होने में अभी करीब एक महीने का समय बाकी है, लेकिन शहर के कई कारोबारियों ने अभी से कैश में कारोबार शुरू कर दिया है।
एक पेट्रोल पंप पर तो QR कोड के ऊपर ही हेल्पर भर्ती का विज्ञापन चस्पा कर दिया गया। छोटे कारोबारी भी विरोध में पीछे नहीं हैं। बाजार में एक दुकान के बाहर सिर्फ कैश में भुगतान स्वीकार करने की तख्ती लगी दिखाई दी, हालांकि बताया जा रहा है कि यह तख्ती पुरानी है।
बताया गया है कि आगामी 15 अक्टूबर से UPI के जरिए 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान लेने पर कारोबारियों को 0.4 फीसदी शुल्क देना होगा। हालांकि सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का असर आम लोगों पर नहीं पड़ेगा। वहीं, P2P यानी Person-to-Person भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा।
इस व्यवस्था को लेकर कारोबारी नाराजगी जता रहे हैं। खासकर ऐसे बाजारों में जहां ग्राहक अक्सर 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान करते हैं, कुछ कारोबारियों ने अभी से UPI के जरिए भुगतान लेना बंद कर दिया है। धामावाला, पलटन बाजार और आसपास के कई व्यापारियों ने इसका विरोध किया है।
व्यापारियों का कहना है कि देश में UPI को लागू हुए करीब 10 साल हो चुके हैं और भारत डिजिटल लेनदेन के मामले में दुनिया में अग्रणी है। ऐसे में अचानक इस तरह का शुल्क लगाए जाने से कारोबारियों को नुकसान होने की आशंका है। उनका कहना है कि इससे उन्हें दोबारा कैश व्यवस्था की ओर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
कुछ कारोबारी इशारों-इशारों में इस शुल्क का भार ग्राहकों पर डालने की बात भी कह रहे हैं। उनका संकेत है कि कुछ व्यापारी किसी न किसी तरीके से इस अतिरिक्त लागत की भरपाई ग्राहकों से कर सकते हैं।
