उत्तराखंड

उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त: अवैध निर्माणों पर मांगी स्टेटस रिपोर्ट, दो हफ्ते में मांगा जवाब


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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए 2 सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं। यह आदेश शहरी क्षेत्रों में हो रहे वैध-अवैध निर्माणों व संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक करने वाले पोर्टल को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संदर्भ में ही दिया गया है।

सभी शहरी निकायों को भेजा गया आदेश

हाईकोर्ट ने उक्त आदेश की प्रति शहरी विकास सचिव, आवास सचिव, व राज्य के सभी शहरी निकायों को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैध और अवैध निर्माणों के ऑनलाइन विवरण के लिए पोर्टल बनाना अनिवार्य है, जिससे नागरिकों को संपत्तियों की स्थिति की पारदर्शी जानकारी भी मिल सके।

ऋषिकेश के अवैध निर्माण को लेकर सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने यह आदेश पंकज अग्रवाल और अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान ही दिया। याचिका में कहा गया है कि ऋषिकेश में कई भवन स्वीकृत नक्शे के विपरीत बनाए जा रहे हैं। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा इन्हें सील भी किया गया था, लेकिन बाद में सहायक अभियंता ने सीलिंग हटा दी और अवैध निर्माणों की कंपाउंडिंग भी कर दी।

हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

कोर्ट ने इस मामले में अवैध निर्माणों को शह देने, उनकी कंपाउंडिंग करने व फ्लैटों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े प्रश्नों पर फैसला सुरक्षित भी रख लिया है। साथ ही कहा कि अवैध निर्माणों पर रोक भी जरूरी है, ताकि पर्यावरण संतुलन भी बनाए रखा जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य: पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, संपत्ति संबंधित पोर्टल बनाने का उद्देश्य यह है कि आम नागरिकों व निवेशकों को यह पता चल सके कि कोई संपत्ति वैध है या अवैध तो नही। इससे वे धोखाधड़ी से बच सकें व सुरक्षित तरीके से संपत्ति की खरीद-फरोख्त भी कर सकें।

राज्यभर में चल रहा है अवैध निर्माण

याचिका में यह भी कहा गया है कि अवैध निर्माण केवल ऋषिकेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देहरादून, मसूरी व अन्य शहरी क्षेत्रों में भी बिना अनुमति निर्माण कार्य भी चल रहे हैं। ऐसे में कोर्ट का यह हस्तक्षेप राज्य भर के शहरी विकास को एक नियमबद्ध दिशा में लाने की ओर अहम कदम भी माना जा रहा है।


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